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पिंपरी चिंचवड साहित्य मंच* आयोजित
श्रावण शु. प्रतिपदा (२५ जुलै २०२५ ) पासून उपक्रम…….
*”लिहिते व्हा…”*….
मालिकेचे नाव : चरित्रात्मक अभंग
भाग क्रमांक :- १७,
बुधवार दिनांक ११ फेब्रुवारी २०२६
प्रस्तुतकर्ता : सौ.माधुरी शिवाजी विधाटे

*संत चोखामेळा*
मेहुणपुऱ्यात | चोखा तो जन्मला |
मंगळवेढ्याला | स्थिरावला ||

दुःख उपेक्षेची | मिळे अनुभूती |
अस्पृश्य ही जाती | म्हणूनिया ||

सवर्णांकडून | सोसलासे त्रास |
अंतरी विश्वास | विठूवरी ||

कुठे जन्म घ्यावा | नाही जरी हाती |
उद्धरली याती | हरीनामे ||

पत्नी सोयरा ही | सात्विक वृत्तीची |
दृढ भक्ती तिची | विठू पदी ||

मेहुणे बंकाजी | भगिनी निर्मळा |
पुत्र कर्म मेळा | संत वृत्ती ||

संपूर्ण कुटुंब | भक्तीत रंगले |
तयांना लाभले | संतपद ||

उत्कट भक्तीचा | वाहे मनी झरा |
भक्त हाच खरा | विठ्ठलाचा ||

विठू दर्शनाची | लागलीसे आस |
मंदिरी प्रवेश | नाही तया ||

वाळवंटी गाऊ | नाचू वाळवंटी |
भेटे जगजेठी | नामातून ||

श्रवण भक्तीने | प्राप्त केले ज्ञान |
मनन चिंतन | करूनिया ||

अद्भुत संगम | ज्ञान प्रतिभेचा |
ठेवा अभंगांचा | मौल्यवान ||

उपेक्षा वेदना | सोसल्या अपार |
विठ्ठल आधार | एकमात्र ||

केला उपदेश | नामस्मरणाचा |
मार्ग समतेचा | दावियेला ||

विठ्ठल तारक | भवसागरात |
नित्य अंतरात | वसतसे ||

नामस्मरणाने | जीणे उद्धरले |
एकरूप झाले | विठू ठायी ||
*®सौ माधुरी शिवाजी विधाटे*

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